नालंदा भगदड़-पति की बांहों में पत्नी ने दम तोड़ा:मन्नत उतारने गई महिला को भीड़ ने कुचला, पढ़िए 8 मौतों की कहानी
‘भगदड़ मचते ही मैं अपनी पत्नी को बाहों में लेकर गिर गया। हमारे ऊपर डेढ़ सौ से ज्यादा लोग गिर पड़े। मैं बुरी तरह दब गया था। अगर 10 मिनट में मदद नहीं मिलती तो मेरी भी जान चली जाती। मेरी पत्नी मुझे छोड़कर चली गई।’ ‘मां सुबह 5 बजे उठकर मंदिर गई थी। बोलकर गई थी कि 9 बजे तक आ जाऊंगी। 10 बजे तक मां घर नहीं लौटी तो चिंता हुई। सोचा भाई को बोलूं कि वो जाकर मां को मंदिर से घर लेकर आए। अंदर कमरे में गई तो भाई मोबाइल देख रहा था, जिसमें मां की मौत की खबर चल रही थी।’ ‘होली पर घर आया था। घरवालों के साथ त्योहार मनाने के बाद दिल्ली चला गया। सुबह ऑफिस जाने की तैयारी कर रहा था कि मां की मौत की खबर मिली। फ्लाइट का टिकट लेकर किसी तरह घर पहुंचा, अब घर में मेरा इंतजार करने वाली मां नहीं है।’ नालंदा के मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए भगदड़ में 8 महिलाओं की मौत हुई थी। दैनिक भास्कर ने महिलाओं के परिवार से मुलाकात की और उनके घर के हालात को समझने की कोशिश की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट। शीतला माता मंदिर में दीपनगर की रहने वाली 45 साल की कांति देवी की मौत हो गई। कांति देवी के पति अर्जुन सिंह बताते हैं कि पत्नी से इस तरह जुदा हो जाऊंगा, कभी सोचा नहीं था। मंगलवार सुबह पत्नी ने मुझसे अचानक मंदिर चलने को कहा। मैं 10 मिनट में तैयार होकर पत्नी के साथ मंदिर के लिए निकला। मंदिर पहुंचने के बाद दोबारा तालाब में स्नान किया और पत्नी के साथ माता शीतला के दर्शन-पूजन के लिए लाइन में खड़ा हो गया। सुबह 7 बजे से 9 बज गए, लेकिन लाइन एक इंच आगे नहीं बढ़ रही थी। करीब साढ़े 9 बजे अचानक धक्का-मुक्की शुरू हुई, जो भगदड़ में तब्दील हो गई। कांति जमीन पर गिर गई, कोई उसके ऊपर न आ जाए। उसे बचाने के लिए मैं नीचे झुका। इसके बाद करीब 150 लोग हम दोनों के ऊपर गिर गए। अर्जुन बताते हैं कि पत्नी का दम घुटने लगा, वो मेरी बाहों में दम तोड़ रही थी, मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। अगर 2-3 मिनट और देर हो जाती तो शायद मेरी भी मौत हो जाती। कांति और अर्जुन सिंह के साथ मौजूद उनकी भतीजी प्रियंका बताती हैं कि मेरी बड़ी मम्मी की मौत के जिम्मेदार पंडा हैं। पैसे के लालच में सारे नियमों को दरकिनार कर दिया था। पिछले दरवाजे से खास लोगों से पैसे लेकर एंट्री करवा रहे थे। भीड़ नियंत्रित करने के लिए अचानक बांस की बैरिकेडिंग की गई। लेकिन धक्का-मुक्की में बांस टूट गया और हम सब एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। नालंदा के बिहार थाना क्षेत्र के सालूगंज की रहने वाली 35 साल की गुड़िया देवी की भी शीतला माता मंदिर में मौत हो गई। गुड़िया देवी मंगलवार को पड़ोसियों के साथ पूजा के लिए गई थी। गुड़िया की बेटी लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि मैं पड़ोसियों के साथ मां को लेकर मंदिर पहुंची थी। सुबह करीब साढ़े 7 बजे पहुंचने के बाद हम लोगों ने देखा कि मंदिर में काफी भीड़ थी। लंबी लाइन में लोग खड़े थे, तिल रखने की जगह नहीं थी। लक्ष्मी ने बताया कि भीड़ देख पड़ोस की महिलाएं घर लौट गई। मैं भी घर आ गई थी, लेकिन मेरी मां पूजा के लिए मंदिर में रुक गई। मोबाइल पर मां की मौत की जानकारी के तुरंत बाद भाई अस्पताल पहुंचा, जहां मां की लाश पड़ी थी। मृतक महिलाओं में नवादा जिले के वारिसलीगंज के कुंभी गांव की रहने वाली 65 साल की आशा देवी की भी मौत हुई। आशा देवी पड़ोस की महिलाओं के साथ मंदिर में पूजा करने गई थी। परिजन के मुताबिक, सुबह 10 बजे तक आशा नहीं लौटीं, तो हम लोगों को चिंता होने लगी। इसी दौरान भगदड़ की सूचना मिली। परिवार के लोग तत्काल मंदिर पहुंचे। यहां काफी खोजबीन की, लेकिन आशा देवी का कहीं कुछ पता नहीं चला। मंदिर में ही पता चला कि कुछ महिलाओं की मौत हुई है, जिनकी लाश को सदर अस्पताल ले जाया गया है। फिर सदर अस्पताल पहुंचे, जहां मोर्चरी के बाहर आशा देवी की लाश पड़ी थी। आशा देवी के बेटे जितेंद्र कुमार ने बताया कि जब ये हादसा हुआ, तब मैं दिल्ली में था। ऑफिस जाने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान भगदड़ में मां की मौत की जानकारी मिली। तत्काल मैं दिल्ली से घर के लिए रवाना हो गया। यहां आया तो पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। नालंदा के बिहार थाना क्षेत्र के सकुनत कला मोहल्ले की रहने वाली 45 साल की रीता देवी की भी भगदड़ में मौत हुई थी। रीता अपनी बेटी के साथ माता शीतला के दर्शन के लिए आई थी। भीड़ से बचने के लिए रीता देवी अपनी बेटी के साथ आई थी। सुबह साढ़े छह बजे दोनों एक साथ लाइन में खड़ी हुई। रीता की बेटी बताती हैं कि एक-एक इंच लाइन आगे बढ़ रही थी। साढ़े नौ बजे अचानक धक्का-मुक्की के बाद भगदड़ मच गई। इस दौरान मां आंखों से ओझल हो गई। मां को मैंने भीड़ में ही तलाशना शुरू किया, एक दो बार तो ऐसा लगा कि मैं भी भीड़ से कुचल जाऊंगी, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। 10 मिनट बाद भीड़ कम हुई तो मां को मैंने जमीन पर पड़ा देखा। जिस भीड़ से बचने के लिए हम लोग सुबह-सुबह मंदिर पहुंचे थे, उसी भीड़ ने मेरी मां को छीन लिया। रीता की बेटी पूनम बताती हैं कि जब मैं अपनी मां को पागलों की तरह ढूंढ रही थी, तब वहां मौजूद लोगों ने मदद करने के बजाय मुझे डांट कर भगा दिया। हम चार बहनें और दो भाई हैं। मेरी तीन बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि मैं और मेरे दोनों भाई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। इस्लामपुर थाना क्षेत्र के मोजफरा गांव की रहने वाली महेंद्र साव की 48 साल की पत्नी देवंती देवी की भी भगदड़ में मौत हो गई। देवंती देवी अपने परिवार के साथ पटना में रहती थी। देवंती पटना से ही अपनी तीन सहेलियों के साथ मां शीतला के दर्शन करने के लिए मघड़ा गई थीं। मंदिर में अचानक मची भगदड़ में वे गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। मृतका के छोटी गोतनी के बेटे बिट्टू कुमार ने बताया कि महेंद्र साव का पूरा परिवार पटना में रहकर मेहनत-मजदूरी करता है। मृतका के दो बेटे और दो बेटियां हैं, सभी शादीशुदा हैं। मथुरापुर गांव की 55 साल की रेखा देवी सुबह सवा आठ बजे के करीब अपने बच्चों के साथ मंदिर पहुंची थीं। रेखा देवी ने प्रसाद लेकर जैसे ही मुख्य द्वार से भीतर प्रवेश किया, मंदिर के भीतर अचानक अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। मृतका के बेटे चंदन कुमार ने बताया कि मंदिर के भीतर प्रवेश का रास्ता खुला था, लेकिन निकास द्वार पर तैनात पंडितों ने उसे भीतर से बंद कर रखा था, जिससे निकासी पूरी तरह ठप हो गई। भीड़ का दबाव बढ़ने और बाहर निकलने का रास्ता न मिलने के कारण लोग नीचे गिरे और दबते चले गए। बेटे का आरोप है कि मची भगदड़ से जान बचाने के लिए लोगों को मंदिर के पीछे लगी सीढ़ी के सहारे छतों पर चढ़कर नीचे कूदना पड़ा। यह घटना मंदिर मैनेजमेंट और पंडितों की जिद की वजह से हुई। मंदिर में भगदड़ के बाद भीड़ कम हुई तो मंदिर के एक कोने में मां अचेत थी। हम आनन-फानन में उन्हें अपनी बाइक से अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में हिलसा थाना क्षेत्र के अरपा गांव की 40 वर्षीय मालो देवी की भी दर्दनाक मौत हो गई। वे अपने गांव के अन्य श्रद्धालुओं के साथ माता के दर्शन कर मन्नत उतारने गई थीं। चश्मदीद पुनीत देवी, कांति देवी और माया देवी ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि हालात इतने भयावह थे कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। लोग गिरते-पड़ते रहे और भीड़ उनके ऊपर से गुजरती रही। मालो देवी ने चैती छठ भी किया था और अपनी एक मन्नत पूरी होने पर आभार प्रकट करने शीतला माता के दरबार में गई थीं। उनके पति अनिल केवट चेन्नई में मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। मालो देवी अपने पीछे तीन बच्चों को छोड़कर गई हैं। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों बेटे अविवाहित हैं। भगदड़ में जान गंवाने वाले 8 श्रद्धालुओं में रहुई थाना क्षेत्र के इतासंग भदवां पंचायत के विशुनपुर गांव की एक महिला भी शामिल है। मृतका की पहचान योगेंद्र यादव उर्फ गुड्डू यादव की 48 साल की पत्नी किरनता देवी के रूप में की गई। परिजनों ने बताया कि किरनता देवी मंगलवार तड़के शीतला मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंच गई थी। मेले और विशेष दिन के कारण मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई थी।
